पटना, 16 अप्रैल 2026: बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक पल आया। 15 अप्रैल को लोकभवन में सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नीतीश कुमार का लंबा युग समाप्त हो गया। लेकिन शपथ की खुशी के साथ ही विपक्षी दलों, खासकर राजद और तेजस्वी यादव की तरफ से तीखा हमला भी शुरू हो गया।
पटना के लोक भवन में दोपहर का समय था। सूरज की रोशनी में गवर्नर सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को शपथ दिलाई। साफ-सुथरे सफेद कुर्ते-पजामे में सम्राट चौधरी मुस्कुराते हुए मंच पर आए। उनके चेहरे पर गर्व और जिम्मेदारी दोनों साफ दिख रहे थे। उनके साथ दो डिप्टी सीएम भी शपथ लेने वाले थे — विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव, दोनों जेडीयू से।
मौके पर बीजेपी और एनडीए के बड़े नेता मौजूद थे। पटना की सड़कों पर भीड़ थी। कुछ लोग जश्न मना रहे थे तो कुछ चुपचाप देख रहे थे। एक आम बिहारी की तरह सोचिए — घर में बैठे 55 साल के रामजी प्रसाद ने टीवी पर यह दृश्य देखा और कहा, “बेटा, अब देखते हैं बिहार कितना आगे बढ़ता है। नीतीश बाबू ने तो बहुत किया, लेकिन अब नया चेहरा आया है।”
नीतीश युग का अंत और एक युग का समापन
नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को आखिरी कैबिनेट मीटिंग के बाद इस्तीफा दे दिया। करीब दो दशक से ज्यादा समय तक बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश अब राज्यसभा सांसद बनकर दिल्ली जा रहे हैं। उनके कार्यकाल में बिहार में सड़कें बनीं, कानून-व्यवस्था सुधरी, महिलाओं को सशक्तिकरण मिला और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़े कदम उठे। लेकिन बेरोजगारी, पलायन और गरीबी अभी भी बिहार की बड़ी समस्या बनी हुई है।
सम्राट चौधरी, जो पहले नीतीश कुमार के डिप्टी सीएम और होम मिनिस्टर थे, अब पूर्ण मुख्यमंत्री बन गए हैं। 57 साल के सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे लंबे समय से बीजेपी में सक्रिय हैं और बिहार में पार्टी का मजबूत चेहरा माने जाते हैं। शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए पद नहीं, बिहार की जनता की सेवा का एक पवित्र अवसर है। मैं ईमानदारी, समर्पण और निष्ठा के साथ हर बिहारी की उम्मीदों पर खरा उतरूंगा।”
उन्होंने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विकास की रफ्तार तेज करने और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संकल्प लिया। कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नई सरकार में युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर सुविधाएं और महिलाओं की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा।
तेजस्वी यादव और राजद का तीखा हमला
शपथ समारोह की खुशी अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि विपक्ष ने हमला बोल दिया। राजद नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तीखा तंज कसा।
तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सम्राट चौधरी जी को बधाई कि उन्होंने चुने हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाने की कसम पूरी कर ली। चुने हुए सीएम को हटाकर चुने गए सीएम बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।”
उन्होंने आगे कहा कि सम्राट चौधरी “लालू यादव की क्लास रूम का प्रोडक्ट” हैं और बिहार की राजनीति अभी भी लालू यादव के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि 20 साल की एनडीए सरकार के बावजूद बिहार का खजाना खाली है, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और गरीबी उन्मूलन में राज्य पीछे है। उन्होंने नई सरकार से चुनौती दी कि बिहार की गरिमा को बाहर के निर्देशों पर न बेचा जाए।
राजद के कार्यकर्ता पटना और दूसरे जिलों में प्रदर्शन भी कर रहे हैं। एक युवा राजद कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “भाई, नीतीश जी चुने हुए थे, ये तो बीजेपी ने चुना है। हम जनता के मुद्दों पर लड़ाई लड़ेंगे। बेरोजगार युवा, किसान और महिलाएं अभी भी परेशान हैं।”
आम बिहारी की भावनाएं जो उम्मीद के साथ-साथ चिंता भी है
पटना के गांधी मैदान के पास चाय की दुकान पर बैठे 42 साल के शिक्षक अशोक कुमार ने कहा, “देखिए, राजनीति तो चलती रहती है। लेकिन हमें तो रोजी-रोटी चाहिए। मेरे दो बेटे दिल्ली और मुंबई में काम कर रहे हैं। अगर यहां अच्छी नौकरियां मिलें तो कौन जाना चाहेगा? नया सीएम जो भी कह रहा है, उसे अमल में लाना होगा।”
मधुबनी जिले की एक महिला किसान रीता देवी ने फोन पर बताया, “हम महिलाओं को नीतीश जी ने साइकिल और शिक्षा दी। अब देखते हैं नया सरकार क्या करती है। लेकिन राजनीतिक लड़ाई में आम आदमी न सताए, यही दुआ है।”
बिहार के युवा वर्ग में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं — “अब विकास की नई लहर आएगी”, तो कुछ कह रहे हैं — “सिर्फ शपथ लेने से नहीं, काम दिखाना पड़ेगा।”
सम्राट चौधरी का सफर – एक आम कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री तक
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्होंने बिहार की राजनीति में लंबा समय बिताया है। पहले वे राजद और जेडीयू में भी रहे, लेकिन बाद में बीजेपी में आकर मजबूत पकड़ बनाई। पार्टी के राज्य अध्यक्ष रह चुके हैं और कई चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नीतीश कुमार के साथ काम करते हुए उन्होंने होम विभाग संभाला और कानून-व्यवस्था पर फोकस किया। अब पूरे बिहार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उनके समर्थक कहते हैं कि वे संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं और विकास के एजेंडे पर काम करेंगे।
आगे क्या?
नई सरकार के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। बिहार में बेरोजगारी दर अभी भी ऊंची है। युवा पलायन जारी है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की जरूरत है। साथ ही जातीय समीकरण, सामाजिक सद्भाव और आर्थिक विकास को संतुलित करना होगा।
सम्राट चौधरी ने कहा है कि वे नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। लेकिन विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि “चुने गए” मुख्यमंत्री जनता की असली उम्मीदों को कितना पूरा कर पाएंगे।
पटना की गलियों में आज एक नई चर्चा शुरू हो गई है। चाय की दुकानों पर, बस स्टैंड पर और घरों में लोग पूछ रहे हैं — “अब बिहार का क्या होगा?” कुछ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, कुछ संशय में हैं।
राजनीति में बदलाव तो होते रहते हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्य में हर बदलाव आम आदमी की जिंदगी को छूता है। चाहे वो सड़क हो, स्कूल हो या नौकरी का सपना।
सम्राट चौधरी की सरकार को अब काम करके साबित करना होगा कि यह शपथ सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा है। तेजस्वी यादव और राजद का हमला भी जारी रहेगा। सियासी घमासान अब और तेज होने वाला है।
बिहार के इतिहास में 15 अप्रैल 2026 एक यादगार तारीख बन गया — जहां एक युग खत्म हुआ और दूसरा शुरू हुआ। अब समय बताएगा कि यह नया अध्याय बिहार के लिए कितना सकारात्मक साबित होगा।