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एक सप्ताह में बिहार सरकार का यू-टर्न: बिहार सरकार ने 7 अप्रैल के विवादित आदेश को वापस लिया, कर्मचारियों में जश्न का माहौल

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By Neeraj Kumar
Published On: April 21, 2026
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पटना, 21 अप्रैल 2026: बिहार की नई सरकार ने कार्यभार संभालते ही सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) ने 7 अप्रैल 2026 को जारी अपने विवादित आदेश को पूरी तरह वापस ले लिया है। इस आदेश के तहत विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों को अपनी पूरी सेवा अवधि में केवल एक बार ही किसी प्रतियोगी या विभागीय परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। अब यह प्रतिबंध हट गया है और कर्मचारी नौकरी पर बने रहते हुए भी एक से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ सकेंगे।

यह फैसला बिहार के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है। आदेश वापस लेने की सूचना सोमवार को जारी की गई, जिसमें डिप्टी सेक्रेटरी राजीव रंजन तिवारी के हस्ताक्षर हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की समीक्षा की और कर्मचारियों के करियर विकास तथा भविष्य को ध्यान में रखते हुए पुराने आदेश को निरस्त करने का निर्देश दिया।

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विवादास्पद आदेश क्या था?

7 अप्रैल (कुछ रिपोर्टों में 6 अप्रैल) 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग ने एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि विभाग के अधीनस्थ कैडर के अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा काल के दौरान केवल एक बार ही उच्च वेतनमान वाले पद के लिए प्रतियोगी परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। अगर कोई कर्मचारी एक से ज्यादा बार परीक्षा देना चाहे, तो उसे पहले अपना पद त्यागना (resign) होगा।

विभाग ने इस आदेश का औचित्य बताते हुए कहा था कि बार-बार परीक्षा की तैयारी और परीक्षा में जाने से विभागीय कार्यों में बाधा पड़ती है। No Objection Certificate (NOC) भी अब केवल एक बार ही जारी किया जाएगा। इससे पहले कर्मचारियों को कई बार (कुछ रिपोर्टों में 5 बार तक) मौका मिलता था।

आदेश जारी होते ही विभाग के कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल गया। कई कर्मचारी इसे अपनी करियर ग्रोथ पर रोक मान रहे थे। सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हुई और आलोचना हुई। कर्मचारी संघों ने भी इस फैसले का विरोध जताया। उनका कहना था कि नौकरी के साथ-साथ बेहतर अवसर तलाशना हर कर्मचारी का अधिकार है और यह फैसला उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

नई सरकार का त्वरित हस्तक्षेप

नीतीश कुमार सरकार से सत्ता हस्तांतरण के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने विभिन्न विभागों की समीक्षा शुरू की। इसी क्रम में UDHD के इस आदेश पर भी गौर किया गया। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा में पाया गया कि यह आदेश कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रहा है और उनकी व्यावसायिक विकास की संभावनाओं को सीमित कर रहा है।

सम्राट चौधरी सरकार का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों को उनकी योग्यता बढ़ाने और बेहतर पदों के लिए प्रयास करने का पूरा अधिकार होना चाहिए, बशर्ते विभागीय कार्यों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसी सोच के तहत पुराना आदेश वापस ले लिया गया। अब कर्मचारी बिना इस्तीफा दिए कई प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे BPSC, SSC, Railway, Banking या अन्य विभागीय परीक्षाएं) में शामिल हो सकेंगे।

कर्मचारियों की प्रतिक्रिया

इस फैसले से बिहार के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। एक क्लर्क ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम लोग सालों से नौकरी करते हुए भी UPSC या BPSC जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। पुराना आदेश हमें हतोत्साहित कर रहा था। अब सरकार ने हमारी समस्या समझी और तुरंत सुधार किया। यह वाकई राहत भरा फैसला है।”

कई कर्मचारी संघों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि नई सरकार कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। एक संघ नेता ने कहा, “यह सिर्फ UDHD तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के सरकारी कर्मचारियों के लिए सकारात्मक संदेश है।”

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक समय में कर्मचारियों की स्किल और योग्यता लगातार अपडेट होती रहनी चाहिए। यदि उन्हें केवल एक ही मौका दिया जाए, तो कई योग्य कर्मचारी अपनी क्षमता के अनुसार आगे नहीं बढ़ पाते। इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान होता है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता भी प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, बिहार जैसे राज्य में जहां युवा प्रतिभाएं सरकारी नौकरियों की ओर आकर्षित होती हैं, कर्मचारियों को करियर ग्रोथ के अवसर प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। नई सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठा रही है।

अन्य फैसलों से जुड़ाव

यह फैसला सम्राट चौधरी सरकार के अन्य कर्मचारी-हितैषी कदमों की कड़ी में आता है। हाल ही में राजस्व विभाग के निलंबित कर्मचारियों के सस्पेंशन को भी वापस लिया गया है। सरकार का फोकस भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विकास कार्यों में तेजी और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान पर है।

विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता बदलते ही पुराने कुछ विवादित फैसलों को पलटना नई सरकार की प्राथमिकता है। इससे कर्मचारियों और आम जनता दोनों में सकारात्मक संदेश जा रहा है।

आगे क्या?

अब नगर विकास एवं आवास विभाग नए दिशानिर्देश जारी करेगा, जिसमें NOC की प्रक्रिया को और सरल बनाया जा सकता है। कर्मचारियों को परीक्षा की तैयारी के लिए उचित छुट्टी या सुविधाएं भी प्रदान करने पर विचार हो रहा है, ताकि विभागीय कार्य भी प्रभावित न हों।

सरकार का यह कदम बिहार में सरकारी तंत्र को और अधिक कुशल और कर्मचारी-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

निष्कर्ष

सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने महज कुछ दिनों में ही कर्मचारियों की एक बड़ी शिकायत का समाधान कर दिखाया है। यह फैसला न केवल हजारों कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नई सरकार सुन रही है और त्वरित कार्रवाई कर रही है।

बिहार के सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए यह एक शुभ संकेत है। अब वे नौकरी की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए स्वतंत्र महसूस कर सकेंगे।

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