नई दिल्ली/पटना, 10 अप्रैल 2026: बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शुक्रवार को दोपहर 12:13 बजे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें अपने चैंबर में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नीतीश कुमार ने शपथ हिंदी में ली।
इस शपथ के साथ नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के दुर्लभ क्लब में शामिल हो गए हैं। वे अब बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा — चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। लालू प्रसाद यादव के बाद वे दूसरे बिहार मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। राजनीतिक विश्लेषक इसे नीतीश कुमार की ‘ग्रैंड स्लैम’ या ‘फोर हाउसेस क्लब’ में एंट्री बता रहे हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन मौजूद रहा?
समारोह छोटा लेकिन बेहद अहम था। शपथ के समय कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। इनमें भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, कानून राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल शामिल थे।
जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा भी मौजूद रहे। इसके अलावा कांग्रेस के राज्यसभा प्रमुख सचेतक जयराम रमेश, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी तथा भाजपा के लोकसभा प्रमुख सचेतक संजय जायसवाल ने भी समारोह में शिरकत की।
शपथ लेने के बाद संजय झा ने नीतीश कुमार को साइन करने के लिए पेन दिया, जिस पर नीतीश मुस्कुराते हुए बोले — “हो गया… चलें?”
राजनीतिक महत्व: बिहार में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत
नीतीश कुमार की राज्यसभा शपथ बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। संविधान के अनुसार राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें राज्य विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ती है, जो उन्होंने पहले ही कर ली थी। अब राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री पद पर ज्यादा दिनों तक नहीं रह सकते।
सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार जल्द ही पटना लौटकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद NDA गठबंधन नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। बिहार के दोनों डिप्टी सीएम — विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी — भी शपथ समारोह में दिल्ली पहुंचे थे।
भाजपा की ओर से नये मुख्यमंत्री के चयन के लिए दिल्ली में बैठकें चल रही हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि नया सीएम भाजपा से हो सकता है, जबकि जेडीयू को कैबिनेट में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। हालांकि अंतिम फैसला NDA की उच्च स्तर की बैठक में लिया जाएगा।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन 1985 से शुरू हुआ जब वे पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा का रास्ता अपनाया और 1989, 1991, 1996, 1998 तथा 1999 में लोकसभा सदस्य चुने गए। केंद्र में उन्होंने रेल मंत्री, सड़क परिवहन मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।
2005 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उसके बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में वे बार-बार सत्ता में लौटे। वे बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री हैं। ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने बिहार में कानून-व्यवस्था, सड़क निर्माण, बिजली, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया।
हालांकि उनकी राजनीति में गठबंधन बदलने की प्रवृत्ति भी चर्चा में रही। वे कई बार महागठबंधन और NDA के बीच स्विच करते रहे, लेकिन अंत में 2024-25 में वे फिर NDA में लौट आए।
राज्यसभा चुनाव और शपथ की पृष्ठभूमि
16 मार्च 2026 को बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव हुए। NDA ने सभी पांच सीटें जीतीं। नीतीश कुमार सहित भाजपा के नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार निर्वाचित हुए।
संविधान के प्रावधान के अनुसार राज्यसभा सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के अंदर राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी पड़ती है। नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा की मौजूदा सदस्यता 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने के बाद 10 अप्रैल को उन्होंने शपथ ली।
प्रधानमंत्री मोदी का बधाई संदेश
शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि नीतीश कुमार देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने बिहार के विकास में नीतीश कुमार के योगदान की सराहना की और अच्छे शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया।
आगे क्या?
नीतीश कुमार अब पूर्ण रूप से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहेंगे। जेडीयू सूत्रों का कहना है कि वे दिल्ली में रहकर पार्टी को मजबूत करेंगे और NDA की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बिहार में नई सरकार के गठन के साथ कैबिनेट विस्तार भी होने की संभावना है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नया मुख्यमंत्री किस जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर चुना जाएगा। ईबीसी, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्गों का समीकरण फिर से महत्वपूर्ण होगा।
नीतीश कुमार की यह शपथ न सिर्फ उनके व्यक्तिगत राजनीतिक करियर का नया अध्याय है, बल्कि बिहार की सत्ता के समीकरण को भी बदलने वाली साबित हो सकती है। 10 अप्रैल 2026 का दिन बिहार की राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।